झोलाछाप नहीं, विश्व-स्तरीय कायरोप्रैक्टर हैं डॉ. राजनिश कांत - ब्रिटिश पार्लियामेंट तक हो चुका है सम्मान


फर्जी यूट्यूब खबरों से सच्चाई नहीं छुपेगी - हजारों मरीजों के मसीहा हैं डॉ. राजनिश कांत

बिहार के गौरव डॉ. राजनिश कांत पर लग रहे निराधार आरोपों का भूषण फॅमिली फाउंडेशन और समर्थकों ने किया खंडन


पटना, 30 सितंबर 2026। पिछले कुछ दिनों से कुछ यूट्यूब चैनलों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पटना के प्रसिद्ध कायरोप्रैक्टर डॉ. राजनिश कांत के खिलाफ भ्रामक और नकारात्मक खबरें चलाई जा रही हैं, यहाँ तक कि उन्हें 'झोलाछाप डॉक्टर' तक कहा गया है। हम इस प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से इसका पुरजोर खंडन करते हैं और जनता के सामने सच्चाई रखते हैं। भूषण फैमिली फाउंडेशन और उनके हजारों शुभचिंतक इस दुष्प्रचार की कड़ी निंदा करते हैं।


कौन हैं डॉ. राजनिश कांत - पूरा इतिहास:


डॉ. राजनिश कांत बिहार के भोजपुर जिले के आरा शहर के बेगमपुरा मोहल्ला के रहने वाले हैं। एक सामान्य परिवार से निकलकर उन्होंने जो मुकाम हासिल किया है, वह पूरे बिहार के लिए गर्व की बात है।


1. शिक्षा और योग्यता - जो फर्जी खबरों में छुपाई गई:

डॉ. राजनिश कांत की शैक्षणिक योग्यता पूर्णतः वैध और अंतरराष्ट्रीय स्तर की है। उन्होंने पहले बिहार से फिजियोथेरेपी में डिग्री हासिल की, उसके बाद फिजियोथेरेपी में PhD की उपाधि प्राप्त की। फिर कनाडा से ऑस्टियोपैथी की विशेष पढ़ाई की और उसके बाद स्वीडन से कायरोप्रैक्टिक की एडवांस ट्रेनिंग ली है। इसके अलावा उन्होंने Pelvis Masterclass सहित कई अंतरराष्ट्रीय सर्टिफिकेशन हासिल किए हैं। यह एक झोलाछाप की नहीं, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षित विशेषज्ञ की पहचान है।


 चिकित्सा पद्धति - बिना दवा, बिना सर्जरी:

वे फिजियोथेरेपी, ऑस्टियोपैथी और कायरोप्रैक्टिक के माध्यम से बिना दवा और बिना सर्जरी के इलाज करते हैं। उनकी मान्यता है कि शरीर के अधिकांश दर्द - जैसे सर्वाइकल, स्लिप डिस्क, सायटिका, कमर दर्द, नसों का दबना, गैस-एसिडिटी, सिरदर्द - रीढ़ की हड्डी के असंतुलन से होते हैं। वे मैनुअल थेरेपी से स्पाइन को अलाइन कर नसों पर से दबाव हटाते हैं। यह पद्धति अमेरिका, कनाडा और यूरोप में व्यापक रूप से मान्य है।


क्लिनिक, फीस और कार्यशैली:

उनका मुख्य क्लिनिक Back To Nature Spine Clinic, बेउर जेल रोड, नियर कुशवाहा चौक, पटना - 800002 और दूसरा क्लिनिक मुंबई के लोखंडवाला, अंधेरी वेस्ट में है। उनकी फीस 30-35 मिनट के सेशन के लिए 30,000 रुपये है, जो इस स्तर की विशेषज्ञता और पूरी तरह से फिजिकल एफर्ट वाले इलाज के लिए सामान्य है। वे महीने में 15 दिन ही प्रैक्टिस करते हैं क्योंकि यह पूरी तरह से शारीरिक मेहनत वाला काम है, एक दिन में सीमित मरीज ही देखे जा सकते हैं।


मानवता की सेवा - निःशुल्क सेवा मिशन जो कोई नहीं बताता:


यही वह सच्चाई है जो फर्जी यूट्यूब चैनल कभी नहीं दिखाएंगे। डॉ. कांत सिर्फ इलाज नहीं, सेवा करते हैं

हर महीने 1 तारीख को पटना क्लिनिक में 100 से 200 मरीजों का पूर्णतः निःशुल्क इलाज किया जाता है। न्यूनतम 100 मरीजों का लक्ष्य हर हाल में पूरा होता है।

CP Child (सेरेब्रल पाल्सी) और मानसिक रूप से बीमार बच्चों का Lifetime Free इलाज* किया जाता है। 1-2 सेशन के बाद उनका आजीवन मुफ्त इलाज किया जाता है।

रोजाना 2 घंटे - 10 गरीब मरीजों की विशेष निःशुल्क सेवा अपने खर्च पर की जाती है।

अब तक लगभग *50,000 मरीजों में से 20,000 से 25,000 मरीजों का मुफ्त इलाज किया जा चुका है।

सेना के जवानों, गरीबों और समाज के लिए* अपने खर्च पर Free Health Awareness Camp का आयोजन किया जाता है। जो व्यक्ति अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा गरीबों में लुटा दे, उसे झोलाछाप कहना कहाँ का न्याय है?


सम्मान और अवॉर्ड - अंतरराष्ट्रीय पहचान:

World Book of Records, लंदन - 18 जुलाई 2024 को ब्रिटिश पार्लियामेंट में सम्मानित किया गया।

Asia Book of Records, दुबई - 29 जून 2024 को सम्मानित।

बेस्ट ऑर्थो और कायरोप्रैक्टर सहित कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सम्मान।

उन्होंने सबसे कम समय में सबसे अधिक मरीजों का सफल इलाज करने का रिकॉर्ड भी बनाया है।


मरीज - बॉलीवुड से लेकर बिहार के नेतृत्व तक सबका भरोसा:

उनके पास बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान, बॉलीवुड स्टार गोविंदा, बॉलीवुड निर्देशक राकेश रोशन, बिहार के उप मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी, पूर्व मुख्यमंत्री श्री लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव, प्रसिद्ध अभिनेता पंकज त्रिपाठी, भोजपुरी सुपरस्टार खेसारी लाल यादव, अक्षरा सिंह, काजल राघवानी , फिल्म प्रचारक संजय भूषण पटियाला सहित कई सेलिब्रिटी और हजारों आम लोग इलाज कराकर स्वस्थ हो चुके हैं। क्या इतने बड़े-बड़े लोग किसी झोलाछाप के पास जाएंगे?


फर्जी पत्रकारिता का पर्दाफाश:

सबसे गंभीर बात यह है कि जिन YouTube चैनलों द्वारा यह फर्जी खबर चलाई जा रही है, उन्हीं में से एक द्वारा ₹1000 देने पर खबर को सपोर्ट करने / हटाने की बात कही गई। इससे स्पष्ट होता है कि यह मामला झोलाछाप का नहीं, बल्कि दबाव बनाकर पैसे वसूलने का है। भूषण फैमिली फाउंडेशन सवाल पूछता है - अगर ₹1000 देने से झोलाछाप अच्छा डॉक्टर बन जाता है, तो यह कैसी पत्रकारिता है? यह ब्लैकमेलिंग है, पत्रकारिता नहीं।


अंत में हम मीडिया के साथियों से अपील करते हैं कि बिना तथ्यों की जांच किए किसी भी डॉक्टर को झोलाछाप कहना न सिर्फ एक मेहनती डॉक्टर का अपमान है, बल्कि बिहार की प्रतिभा का भी अपमान है। डॉ. राजनिश कांत का मिशन 'दर्द मुक्त भारत' है और हम सब उनके साथ हैं!

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